INDIAN TEMPLE1: तिमारपुर स्थित प्राचीन श्री संतोषी माता मंदिर की 43वीं वर्षगांठ मनाई गई। मान्यता है कि इस मंदिर में हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है।
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इंफोपोस्ट न्यूज
तिमारपुर, दिल्ली। INDIAN TEMPLE1: जो सच्ची भक्ति के साथ श्री संतोषी माता मंदिर में आता है, उसकी झोली मां संतोषी भर देती हैं। श्री संतोषी माता मंदिर की 43वीं वर्षगांठ के मौके पर मंदिर के प्रधान प्रेमचंद भगत और उप प्रधान जितेंद्र कुमार ने कहा कि माता का मंदिर सभी के लिए खुला है।
भक्तों का विश्वास ही उनको लेकर आता है। यहां जो भी एक बार आता है, बार बार आना चाहता है। वर्षगांठ पर हवन और भंडारे का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मंदिर के सलाहकार कृष्ण रलहन ने कहा, मैं पिछले 15 वर्षों से इस मंदिर में आ रहा हूं। और माता ने हमेशा मेरी हर मनोकामना पूर्ण की है। कुछ साल बाद 50वीं वर्षगांठ पर भव्य आयोजन किया जाएगा। मुख्य सलाहकार राधे श्याम भी उपस्थित थे।
अगस्तेश्वर के आंगन में निकली थीं मां संतोषी
हरसिद्धि के पीछे चौरासी महादेव मंदिरों के क्रम में प्रथम महादेव श्री अगस्तेश्वर महादेव के आंगन में संतोषी माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां देवी की प्रतिमा प्राण-प्रतिष्ठित नहीं की गई है। प्रतिमा स्वयंभू बताई जाती है।
मंदिर के पुजारी मनोज गोस्वामी ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पहले उनके परिवार के एक सदस्य को अगस्तेश्वर महादेव की पूजा करते समय इस स्थान पर देवी प्रतिमा होने का स्वप्न आया था। जब खुदाई की गई तो माता की बैठी हुई मुद्रा में प्रतिमा निकली।
तब से इस मंदिर में संतोषी माता के रूप में दर्शन देकर भक्तों का कल्याण कर रही हैं। नवरात्रि में सुबह-शाम आरती-पूजा और शृंगार दर्शन होते हैं।
16 शुक्रवार दर्शन से पूरी होती है मुराद
मान्यता है कि संतोषी माता के 16 शुक्रवार को दर्शन करने से मां सब की मुराद पूरी करती है। व्रत करने वाली महिलाओं का यहां शुक्रवार को मेला लगता है। संतोषी माता को तुष्टि देवी भी कहा जाता है और यह गणेश जी की पुत्री व शुभ-लाभ की बहन भी कहलाती है।
उज्जैन का संतोषी माता मंदिर फिल्म जय संतोषी मां में दिखया जा चुका है। जब यह फिल्म बन रही थी, उस समय डायरेक्टर को मंदिर की ख्याति के बारे में पता चला तो वे यूनिट के साथ शूटिंग करने पहुंच गए थे।


