Ministry of Earth Sciences: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत संचालित राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र की ओर से एक दिवसीय ओपन हाउस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के सभी क्षेत्रों से लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
Ministry of Earth Sciences: अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव की जानकारी दी
संदीप कुमार गर्ग
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Ministry of Earth Sciences: नोएडा के सेक्टर-62 स्थित पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत संचालित राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (रा.म.अ.मौ.पू.कें.) मौसम और जलवायु मॉडलिंग में उत्कृष्टता का केंद्र है। रा.म.अ.मौ.पू.कें. ने भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ)-2023 के बारे में सूचना देने और इसका प्रचार करने के साथ अपने केंद्र पर होने वाली अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से 20 दिसंबर को एक दिवसीय ओपन हाउस (आउटरीच) कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम के माध्यम से केंद्र में चल रही अनुसंधान और विकास गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया। सभी प्रतिभागियों, विशेषकर छात्रों को 17 से 20 जनवरी 2024 के दौरान फरीदाबाद, हरियाणा में डीबीटी-टीएचएसटीआई आरसीबी परिसर में निर्धारित आईआईएसएफ-2023 में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित किया गया।
आयोजनों के बारे में दी प्रस्तुति
विज्ञान भारती (वि.भा.) के प्रतिनिधि डॉ. सुमित कुमार मिश्रा ने IISF-2023 के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों के बारे में एक प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम में समाज के सभी क्षेत्रों से लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली, सेंट थॉमस स्कूल इंदिरापुरम, सेंट थॉमस स्कूल लोनी, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला नई दिल्ली, शारदा विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा, एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा, सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट नोएडा, एबीईएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग गाजियाबाद के प्रतिनिधित्व उनके छात्र, शोध-कर्मी और प्राध्यापकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में समाज के कई लोग और मीडियाकर्मी भी शामिल हुए।
क्या करता है पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ?
भारत सरकार के अधीन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) को मौसम, जलवायु, समुद्र और तटीय दशा, जल विज्ञान, भूकंप विज्ञान और प्राकृतिक संकटों के लिए सेवाएं प्रदान करता है। देश के लिए धारणीय तरीके से समुद्री सजीव और निर्जीव संसाधनों की खोज भी करता है। उनका दोहन करने और पृथ्वी के तीनों ध्रुवों (आर्कटिक, अंटार्कटिक और हिमालय) का अन्वेषण करने के लिए इसे अधिदेश दिया गया है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय पहले महासागर विकास विभाग (DOD) था, जिसे जुलाई 1981 में भारत के प्रधानमंत्री के प्रभार में सीधे मंत्रिमंडल सचिवालय के एक भाग के रूप में बनाया गया था। मार्च 1982 में यह एक अलग विभाग के रूप में अस्तित्व में आया। पहले महासागर विकास विभाग ने देश में समुद्री विकास गतिविधियों के आयोजन, समन्वय और इन्हें बढ़ावा देने के लिए एक नोडल संस्थान के रूप में कार्य किया। भारत सरकार ने महासागर विकास विभाग को फरवरी 2006 में महासागर विकास मंत्रालय के रूप में अधिसूचित किया।
जुलाई 2006 में, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रपति की अधिसूचना के माध्यम से महासागर विकास मंत्रालय का नए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) में पुनर्गठनकिया गया था। इससे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), दिल्ली, भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF), नोएडा, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय प्रशासन की परिधि में आ गए। सरकार ने अंतरिक्ष आयोग (भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रशासन के लिए उत्तरदायी सरकारी विभाग) और परमाणु ऊर्जा आयोग (परमाणु ऊर्जा विभाग का शासी निकाय) की तर्ज पर पृथ्वी आयोग की स्थापना को भी मंजूरी दी।


