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Shamelessness of government: किसान आंदोलन को कुचलने की रणनीति

December 15, 2020
Shamelessness of government

Shamelessness of government: कानून बनने से पहले ही अडानी ने फसलों के भंडारण के लिए गोदाम और मंडियों के लिए जमीन खरीदनी शुरू कर दी थी। हरियाणा के पानीपत में 100 एकड़ जमीन पर बन रहा अडानी का गोदाम मोदी सरकार की बदनीयत बता रहा है।

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Shamelessness of government: अडानी का गोदाम मोदी सरकार की बदनीयत

चरण सिंह

नई दिल्ली। Shamelessness of government: इसे कहते हैं चोरी ऊपर से सीना जोरी। मोदी सरकार ने किसान ही नहीं बल्कि पूरी जनता को बदहाल स्थिति में लाने के लिए किसान कानून बना दिए। पर अभी भी बेशर्मी से इन्हें सही साबित करने का दुस्साहस किया जा रहा है।

किसान कानूनों को वापस कराने के लिए पूरे देश का किसान सड़कों पर बैठा है। कानून बनने से पहले ही अडानी ने फसलों के भंडारण के लिए गोदाम और मंडियों के लिए जमीन खरीदनी शुरू कर दी थी। हरियाणा के पानीपत में 100 एकड़ जमीन पर बन रहा अडानी का गोदाम मोदी सरकार की बदनीयत चिल्ला-चिल्ला कर बता रहा है।

उद्योगपतियों को भंडारण की छूट

Shamelessness of government: कानूनों में उद्योगपतियों को फसलों के भंडारण की छूट जगजाहिर हो चुकी है। कांट्रेक्ट पर किसानों की जमीन लेकर उद्योगपतियों को लोन लेने और उसे गिरवी रखने का दिया गया अधिकार सबकी समझ में आ गया है। उद्योगपति के साथ विवाद होने पर किसान ने कोर्ट जाने का छीना गया अधिकार सरकार का पूंजपतियों का साथ देना दर्शा रहा है।

कानून में एमएसपी का मेनसन न होना किसान की फसल फसल ओने-पौने दाम पर लेने की नीयत बता रहा है। किसान कानून लाने से पहले मोदी सरकार का किसान संगठनों या फिर किसी किसान से बात न कर कॉरपोरेट घरानों के साथ मीटिंग करना कानूनों को पूंजीपीतियों का हितैषी बता रहा है। फिर भी बड़ी बेशर्मी से कानूनों को किसान के फायदे का बताया जा रहा है।

यूनियन को मैनेज करने की चाल

Shamelessness of government: नोएडा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भानू किसान यूनियन को मैनेज कर रास्ता खुलवाना इसी रणनीति का हिस्सा है। मोदी सरकार की हठधर्मिता देखिए कि इधर किसान कानून वापस कराने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गये हैं तो उधर भाजपा ने देश में किसान सम्मेलन के माध्यम से किसान कानूनों के फायदे गिनाने शुुरू कर दिए हैं।

समझने की बात यह है कि मोदी सरकार ने किसानों को गलत साबित करने के लिए उत्तर प्रदेश चुना है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने बाकायदा एक बयान जारी कर कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लाये गये कृषि विधेयक को लेकर किसानों में भ्रम फैलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 14 दिसम्बर से 18 दिसम्बर तक किसान सम्मेलनों के माध्यम से किसान कानूनों के फायदों के गिनाने की रणनीति भाजपा अपना रही है।

एनआरसी और सीएए की तर्ज

Shamelessness of government: ये सब एनआरसी और सीएए आंदोलन को कुचलने की तर्ज पर हो रहा है। ये सम्मेलन ऐसे में रखे गये हैं जब किसान आंदोलन ने गति पकड़ ली और उत्तर प्रदेश में विपक्ष की मुख्य पार्टी समाजवादी पार्टी पदयात्रा के माध्यम से किसान कानूनों के खिलाफ सडक़ों पर है।

ऐसे में आंदालनकारियों व सत्तारूढ़ नेताओं के बीच टकराव होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिरकार ये फायदे किन्हें बताए जाएंगे। किसान तो सडक़ों पर आंदोलन कर रहे हैं। किसान कानूनों के मामले में मोदी सरकार का रवैया बिल्कुल उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाला साबित हो रहा है।

किसानों की जमीन हड़पने की साजिश

Shamelessness of government: मोदी सरकार ने किसानों की जमीन हड़पने के लिए देश के शीर्ष पूंजीपतियों के पक्ष में किसान कानून बनाए और अब जब किसान इनका विरोध कर रहा है तो उन्हें खालिस्तानी, पाकिस्तान, चीन समर्थक, नक्सली जैसे शब्दों की संज्ञा दी जा रही है।

किसान कानूनों की आड़ में सत्तारूढ़ नेता भी अपना खेल खेल खेलने लगे हैं। हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल पर भाकियू के एक नेता ने आरोप लगाया है कि उन्होंने भिवानी के लोहारू में 14 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाली मंडी के लिए अवैध रूप से जमीन खरीद है। बाकायदा उनके बेटे के नाम रजिस्ट्री कराने की बात भी सामने आ रही है।

डंडे के जोर की राजनीति

Shamelessness of government: दरअसल मोदी सरकार ने जिस तरह से जम्मू-कश्मीर में दमन का रास्ता अपनाकर 370 हटा दी। जिस तरह से एनआरसी और सीएए के आंदोलन को कुचल दिया। ऐसे ही डंडे के जोर और मोदी मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों को बरगला कर किसान आंदोलन को बदनाम करना चाहती है।

हालांकि हरियाणा में खट्टर सरकार में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मिलकर एमएसपी पर कानून लाकर इज्जत बचाने की सलाह देने की बात सामने आ रही है। वैसे भी जिस तरह से किसान संगठनों के अलावा ट्रेड यूनियनों, वकीलों ने आगे बढक़र किसान आंदोलन को समर्थन दिया है।

ऐसे में अब यह आंदोलन मोदी और योगी सरकार के दमन से कुचले जाने से बाहर हो गया है। यदि अब भी मोदी सरकार आंदोलन को बदनाम कर अपनी चतुराई दिखाती रही तो उसका यह कदम उसके लिए और आफत बनने वाला है।

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